बहुत याद आते हो तुम

            " बहुत याद आते हो तुम"
बहुत याद आते हो तुम, बहुत याद आते हो तुम।२।
तुझे एक पल भी भुला मैं ना पाऊँ,
                 व्यथा अपने मन की किसे मैं सुनाऊँ,
कि कितना रुलाते हो तुम,बहुत याद आते हो तुम ॥
वो कहना तुम्हरा मुझे मत भुलाना,कभी मेरे हमदम न मुझको रुलाना ।  
           हमारी मुहब्बत न हो जाये रुसवा           
                    मेरा नाम अपने न होटों  पे लाना ।
किया तुझसे वादा निभा मैं रहा हूँ,
                    तेरा नाम लव तक न मैं ला रहा हूँ।
तुम्हे सच बताते हैं हम,बहुत याद आते हो तुम॥
जो रातों की तन्हाई में चाँद देखूँ 
                    तो अक्सर तुम्हारे ही बारे मे सोचूँ ,
कभी पास मेरे था एक चाँद मेरा
                 मेरे दिल में हर पल था उसका बसेरा ।
मैं रातों को जागूँ जहाँ सो गया है
              मेरा चाँद जाने कहाँ खो गया है।
उसे बस बुलाते हैं हम,बहुत याद आते हो तुम ॥

बहुत बार सोचा तुझे भूल जाऊँ 
                 न ख्वावों खयालों में तुझको मैं लाऊँ
तेरे अक्सको अपने दिल से मिटा दूँ,
               नहीं कुछ तू मेरा ये सबको बता दूँ ।
भुलाने की खातिर करूँ याद तुझको,
              है नादान दिल कैसे समझाऊँ इसको,
 नहीं भूल पाते है हम, बहुत याद आते हो तुम।
बहुत याद आते हो तुम, बहुत याद आते हो तुम ॥

                           ✍️✍️अनंतराम मिश्र

               

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