राँग नम्बर
राँग नम्बर
मेरे मोबाइल पर नये नम्बर से मिश्काल आ रही थी,
जो मुझे तंगकिये जा रही थी,
क्लास से निकल कर मैने मिश्डकाल को बापस घुमाया, तो कम्प्यूटर ने
मेरा बैलेंस ग्रेस पीरियड में बताया, मैं कुछ सोच ही रह था तभी मोबाइल
फ़िर घनघनाया,काल रिसीव करते ही कोकिल सद्रश नारी स्वर श्रवण रन्ध्रो
से टकराया, उसने फ़र्माया आप कहाँ से बोल रहे हैं ,मैं आश्चर्य मिश्रित स्वर में बोला> क्या आप किसी दूसरे ग्रह की प्राणी हैं, क्या आपने अभी तक नहीं जान पाया कि जब से मानव इस धरती पर आया,बेचारा रोजी रोटी की जुगाड में इधर से उधर उधर से इधर डोल रहा है और संसार का प्रत्येक प्राणी अपने मुखारबिन्द से
ही बोल रहा है,वो बोली नहीं मेरा मतलब है आप किस स्थान से बोल रहे हैं,
मैनें आवाज को गम्भीर बनाकर उत्तर दिया, हमारे इस कान्तियुक्त शरीर को जब
ईश्वर ने बनाया तब परमपिता परमेश्वर ने नासिका और ठॊढी के मध्य जिस स्थान को सजाया जिस से रोटी ,दाल सब्जी पानी सबकुछ ढकोल रहे हैं , हे सुन्दरी हम
उसी स्थान से बोल रहे हैं,वो बोली किस पागल से पाला पडा है मैने कहा वन्दा पागल नहीं पूरे होशोहवास में खड़ा है,उसने कहा तो आप हमें इस तरह क्यों सताते हैं अपना ठीक परिचय क्यों नहीं बताते हैं मैं बॊला फोन तो आपने मिलाया है आप
ही बतायें कहाँ के लिये लगाया है, उसको शायद मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं सूझ रहा था पर मेरा मन उत्तर पाने को जूझ रहा था,
उधर से स्वर में और मिठास घोलकर कहा गया
आप बातें बहुत अच्छी बनाते हैं, दुनिया में ऐसे लोग कम ही पाये जाते हैं ,
मैंने तो आज से आप को अपना दोस्त मान लिया है पर दोस्त होने का सबूत,
अभी तक आपने कहाँ दिया है,मैं बोला मैं न आपको जानूँ न पहचानू तो कैसे
आपको अपना दोस्त मानू वो बोली जान पहचान तो दो पल मे हो जाती है
दोस्ती का दूसरा नाम कुर्बानी है ,
बस यार सौ रुपये का रिचार्ज मेरे नम्बर पर करवा दो ये हमारी दोस्ती की
पहली निशानी है ,और कहा तुम कितने अच्छे हो दिल तुम्हारी बातों पर फ़िदा है,
तब मैंने भी बड़े रोमांटिक अन्दाज मे कहा , पर क्या करूँ मैडम वन्दा तो पहले
से ही शादीशुदा है वो घबराकर बोली साॅरी लगता है राँग नम्बर से कान्टेक्ट हो गया,
मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही मेरा फोन डिस्कनेक्ट हो गया
अनन्तराम मिश्रा
मेरे मोबाइल पर नये नम्बर से मिश्काल आ रही थी,जो मुझे तंगकिये जा रही थी,
क्लास से निकल कर मैने मिश्डकाल को बापस घुमाया, तो कम्प्यूटर ने
मेरा बैलेंस ग्रेस पीरियड में बताया, मैं कुछ सोच ही रह था तभी मोबाइल
फ़िर घनघनाया,काल रिसीव करते ही कोकिल सद्रश नारी स्वर श्रवण रन्ध्रो
से टकराया, उसने फ़र्माया आप कहाँ से बोल रहे हैं ,मैं आश्चर्य मिश्रित स्वर में बोला> क्या आप किसी दूसरे ग्रह की प्राणी हैं, क्या आपने अभी तक नहीं जान पाया कि जब से मानव इस धरती पर आया,बेचारा रोजी रोटी की जुगाड में इधर से उधर उधर से इधर डोल रहा है और संसार का प्रत्येक प्राणी अपने मुखारबिन्द से
ही बोल रहा है,वो बोली नहीं मेरा मतलब है आप किस स्थान से बोल रहे हैं,
मैनें आवाज को गम्भीर बनाकर उत्तर दिया, हमारे इस कान्तियुक्त शरीर को जब
ईश्वर ने बनाया तब परमपिता परमेश्वर ने नासिका और ठॊढी के मध्य जिस स्थान को सजाया जिस से रोटी ,दाल सब्जी पानी सबकुछ ढकोल रहे हैं , हे सुन्दरी हम
उसी स्थान से बोल रहे हैं,वो बोली किस पागल से पाला पडा है मैने कहा वन्दा पागल नहीं पूरे होशोहवास में खड़ा है,उसने कहा तो आप हमें इस तरह क्यों सताते हैं अपना ठीक परिचय क्यों नहीं बताते हैं मैं बॊला फोन तो आपने मिलाया है आप
ही बतायें कहाँ के लिये लगाया है, उसको शायद मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं सूझ रहा था पर मेरा मन उत्तर पाने को जूझ रहा था,
उधर से स्वर में और मिठास घोलकर कहा गया
आप बातें बहुत अच्छी बनाते हैं, दुनिया में ऐसे लोग कम ही पाये जाते हैं ,
मैंने तो आज से आप को अपना दोस्त मान लिया है पर दोस्त होने का सबूत,
अभी तक आपने कहाँ दिया है,मैं बोला मैं न आपको जानूँ न पहचानू तो कैसे
आपको अपना दोस्त मानू वो बोली जान पहचान तो दो पल मे हो जाती है
दोस्ती का दूसरा नाम कुर्बानी है ,
बस यार सौ रुपये का रिचार्ज मेरे नम्बर पर करवा दो ये हमारी दोस्ती की
पहली निशानी है ,और कहा तुम कितने अच्छे हो दिल तुम्हारी बातों पर फ़िदा है,
तब मैंने भी बड़े रोमांटिक अन्दाज मे कहा , पर क्या करूँ मैडम वन्दा तो पहले
से ही शादीशुदा है वो घबराकर बोली साॅरी लगता है राँग नम्बर से कान्टेक्ट हो गया,
मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही मेरा फोन डिस्कनेक्ट हो गया
अनन्तराम मिश्रा
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