तुम गुलाब हो

देख जिसको प्यास बढ़ती तुम वो आव हो ,
मैं सत्य बोलता हूँ प्रिये तुम गुलाब  हो |
आँखे कमल की पंखुड़ी,जो नींद मेरी ले उड़ी ,
तुम अप्सरा या हूर हो लेकिन नहीं मगरूर हो |
सौंदर्य की प्रतिमा हो या,हलके नशे का शुरूर हो ,
चढ़के न जो उतरे सनम ,तुम वो शराब हो |
मैं सत्य बोलता ...............................................
स्वप्न हो या तुम हकीकत मैं समझ पाया नहीं ,
देख ली दुनिया मगर ,तुझसा कोई भाया नहीं |
रह गया हैरान मैनें जान ली जब बात  यह ,
प्यार धरती पर फरिस्तों से किया  जाता  नहीं |
आसमाँ की परियों से, बढ़कर  जनाब  हो ||
मैं सत्य बोलता हूँ .............................................
नर्म नाजुक लव हिलें तो, फूल बरसें घर अँगन में ,
देखकर ऐसा नजारा ,  फूल शर्मायें चमन में |
रात में तुम्हे देख छत पर चाँद छुप जाये गगन में,
बस चले मेरा अगर तुमको छुपा लूँ निज नयन में |
दुनिया के गुलशनों का ,तुम ही शबाव हो ||

मैं सत्य बोलता हूँ  प्रिये तुम गुलाब हो || 

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