"तो क्या करें "

हमने अपने गुरुदेव श्री विमल शुक्ला जी  के ब्लॉग पर एक लेख पढ़ा बदल गया स्कूल आज के हालत पर एकदम सटीक है गुरू और चेलों का सम्बन्ध सिर्फ अपना अपना उल्लू सीधा करने तक रह गया है ये बात बिल्कुल सत्य है परन्तु उस लेख के छंद की 
अंतिम पंक्ति जिसमें टियुशन बाले गुरुओं के लिए कहा गया है विद्यालय को छोड़ क्लास टियुशन की लेता ; इस पंक्ति पर कुछ कहना चाहूँगा >>>>
   टियुशन जो गुरु ना करे तो भूखों मरि जाये,
                         प्राइवेटन स्कूल मा मिलत कितनी तनुखाह |
मिलत कितनी तनुखाह खर्च को कैसे चलावें ,
                      जो ना टियुशन करे कर्ज सिर पर चढि जावे |
भला करे भगवान सभी सरकारी गुरु का    
                   जिनकी खातिर टियुशन का धंधा है फलता || 

शुक्ला जी की पोस्ट देखने के लिए कृपया उनके ब्लॉग पर जाएँ पता है >>

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