"परी हो तुम"
तुझे देख के यूं लगता तू उसका ही साया है
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रब ने तुझको
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मस्ती भरी आँखों में ,हिरनों सी है
चंचलता ,
तेरे मद भरे अधरों से से छलके मधु की
सरिता,
और सुर्ख कपोलों में पुष्पों सी है कोमलता ,
नागिन ने भी लहराना तेरी लटों से पाया है
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रब ने तुझको
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जब जब मुस्काती हो तब तब चमकें मोती ,
तेरा अंग अंग यूं दमके जले तिमिर में
ज्यों ज्योती ,
तेरा रूप देख मोहें साधू सन्यासी यती ,
किस्मत वाला वो है जिसने तुझे पाया है ||
रब ने तुझको
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तुझे प्यार से मैं देखूं या प्यार करूँ
तुझको ,
मिलना तो बड़ा मुश्किल पाऊँगा कहाँ तुझको
,
तुझे दिल में बसा लूँ पर अफ़सोस है ये मुझको ,
तुझे दिल में बसा लूँ पर अफ़सोस है ये मुझको ,
परियों को धरा पर क्या कभी किसी ने पाया
है ||
रब ने तुझको जाना कुछ ऐसे बनाया है ,
तुझे देख के यूं लगता तू उसका ही साया है
||

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