सत्य घटना दूध पीने वाला भूत

एक दिन मेरे मित्र जितेन्द्र सिंह ने मुझसे एक प्रश्न किया , यार सच बताओ क्या भूत वास्तव में होते हैं या ये सिर्फ लोगों का वहम है | मैनें पूछा तुम्हारी क्या राय है तुम, क्या मानते हो ,उसने बताया बैसे मैंने आज तक कोई भूत बूत कुछ नही देखा मगर लोंगों से सुना है और एक बात सच बताऊँ मैं डरता भी बहुत हूँ पता नहीं क्यों |
ये सच है कभी कभी हम सुनी सुनाई बातों पर भरोसा कर लेते हैं तथा किसी बात
की गहराई में जाये बगैर विश्वास कर लेते हैं हमारा वही विश्वास अन्धविश्वास कहलाता है ,और समाज में कुछ प्राणी ऐसे भी होते हैं जो ऐसी बातों में खूब नमक मिर्च लगाकर
दूसरों को  सुनाते हैं वे बातें हमारे मन में कुछ इस तरह समां जाती हैं कि भुलाये नहीं
भूलतीं वही हाल मेरे दोस्त का भी है , मैनें हँसकर कहा यार कहने को सिंह हो मगर
रात में लघुशंका के लिए भी बिना पत्नी को साथ लिए नहीं जाते ,उसने मुझसे कहा यार क्या करूँ कोई उपाय बताओ जिससे रात को बाहर जाने में डर ना लगे मैंने कहा यार
मैं तुम्हे अपनी आप बीती सुनाता हूँ शायद  उसे सुनकर कुछ हद तक तुम्हारा डर कम हो जाये >>>>> बात सन २०१० की है उस समय मैं हरियाणा के अम्बाला शहर में नौकरी करता था मुझे कम्पनी की कालोनी में ही एक कमरा मिला हुआ था कालोनी की इमारत तीन मंजिला थी मेरा कमरा सेकेण्ड फ्लोर पर था पर मुझे बीच के फ्लोर पर रहना कुछ अच्छा नहीं लग रहा था अवकाश बाले दिन मैं पूरी कालोनी में घूमा तो
मैनें पाया सबसे ऊपर की मंजिल पर एक कमरा बिल्कुल खाली था इतना अच्छा कमरा और खाली पड़ा है मैंने सोचा काश ये कमरा मुझे मिल जाता तो मेरी जो इच्छा है ऊपर के फ्लोर पर रहने की वो पूरी हो जाती इस सन्दर्भ में मैंने कालोनी इंचार्ज से बात की
कालोनी इंचार्ज क्षत्रिय था और मेरा काफी सम्मान करता था , मुझसे कहा मिश्रा जी आपके लिए कोई मनाही है क्या मगर वो कमरा ठीक नहीं है उसमें कोई भूत प्रेत का मामला है इसलिए कोई भी उस कमरे में नहीं  रहता और वो खाली पड़ा रहता है ,
मैंने कहा कोई बात नहीं आप उसे मेरे नाम से एलाट कर दें मै उसी में रहूँगा जो होगा देखा जायेगा , और उसी दिन मैनें कमरा चेंज कर लिया अपना सारा सामान सबसे ऊपर
बाले कमरे में पहुंचा दिया शाम तक टीवी केबल से लेकर बेड  बिस्तर सब कुछ कम्प्लीट हो चुका था कमरे में |  मैं   काफी थक भी चुका था इसलिए कैंटीन से खाना खाकर
जल्दी सो गया क्योंकि सुबह डियूटी भी तो जाना था |
दो तीन दिन गुजर गए लेकिन मुझे वहाँ रहने में कोई भी किसी तरह की तकलीफ नजर
नहीं आई ,मगर कुछ लोग उस कमरे के बारे में तरह तरह की बातें बनाते रहे और मुझे डराने का भी प्रयास करते रहे मगर मैं कब डरने बाला था पर दिल में कभी कभी सोचने
जरूर लगता था क्या कुछ है तो नहीं लेकिन ऐसे ख्यालों को कभी अपने दिमाग पर मैनें
हावी नहीं होने दिया |
एक दिन मेरे साथ एक अजीबोगरीब घटना घटी मैं प्रतिदिन शाम को चाय बनाने के लिए दूध लेता था शाम को चाय बनाने के बाद बचा हुआ दूध भगौने में ढककर रख देता था | उस दिन सुबह जब जागा तो देखा ढक्कन नीचे पड़ा है और सारा दूध गायब मैंने ज्यादा फ़िक्र नहीं की सोचा शायद दरवाजा खुला रह गया हो और बिल्ली हाथ साफ कर गई होगी ,खैर जाने दो मगर दूसरे दिन जब खूब जान समझ कर दरवाजा बंद करके सोया तब भी मुझे दूध साफ मिला मुझे आश्चर्य हुआ और थोड़ा लोगों की बातों पर विश्वास भी होने लगा ,पर दिमाग मानने को तैयार नहीं हुआ | मगर लगातार जब रोज
ऐसा होने लगा मैंने ये बात कुछ लोगों को बताई तो उन्होंने भी जो बताया वो बस मुझे डराने बाली ही बातें थीं मैंने भी मन में निश्चय कर लिया की कुछ भी हो आज रात को वास्तविकता का पता लगाकर ही रहूँगा|
उस दिन रात को रोज की तरह ही वहीं पर दूध रखने के बाद लगभग १० बजे तक टीवी
देखता रहा ,उसके बाद जैसे ही टी वी और बल्व बंद करके सोने का प्रयास कर ही रहा था कि तभी प्लेट गिरने की आवाज हुई मै झट से उठा और बल्व जलाया तो देखा
प्लेट नीचे पडी हुई है दरवाजे खिड़की सभी बंद मगर प्लेट गिराने बाला कहीं नहीं था ,
अब मुझे भी कुछ डर लगने लगा था मैंने प्लेट को फिर भगौने के ऊपर रख दिया ,
और असलियत जानने के लिए बल्व बंद करके बोर्ड के पास ही खड़ा हो गया |
दिल में तरह तरह के विचार उठ रहे थे ,पर दिमाग वास्तविकता जानने के लिए
कटिबद्ध था | मझे ज्यादा देर प्रतीक्षा नही करनी पड़ी फिर से प्लेट गिरने की आवाज
हुई मैनें फटाक से तुरंत बल्व जला दिया इस बार जो दृश्य देखा उसे देखकर हँसी
आ गई क्योंकि सामने एक छोटी सी भूरी बिल्ली बैठी आँखें चमका रही थी , लेकिन अब मेरी उत्सुकता यह जानने को बढी की ये बिल्ली अन्दर कैसे आई और बाहर कैसे
निकलेगी ,मैं बड़े ध्यान से बिल्ली की तरफ देख रहा था ,उसने दरवाजे की ओर छलांग
लगाई और अपने शरीर को  बिल्कुल पतला करके उसकी दरार से आसानी  में निकल गई आज पहली बार मुझे ये बात भी मालूम हुई कि बिल्ली इतने संकरे स्थान से भी निकल सकती है , मैनें दराज में ढेर सा कपड़ा भी लगा दिया , उसके बाद काफी दिनों तक उस
कमरे में रहा मगर उस दिन के बाद मुझे दूध पीने वाला भूत या और कोई भूत दिखाई  नहीं दिया ,और लोगों की कपोल कल्पित बातें भी मिथ्या साबित हुईं |
ये कहानी एकदम सत्य है ||

                        अनन्तराम मिश्रा ````

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