पैरोडी रचना तर्ज < तू मेरी जिन्दगी है
ये मानव जिन्दगी है
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बड़े भाग्य से तूने नर तन है पाया 2, पड़कर
प्रपंचों में समय को गँवाया |
ईश्वर को भूला प्यारे लावधुन लगी है ,ये
मानव जिन्दगी है |कर्मों ....................
समझा तू जिसको अपना वो सब है पराया साथ
में न जा पायेगी तेरी भी काया |
जानकार भी मन में धन की तृष्णा जगी है ,
ये मानव जिन्दगी है ..................
ईश्वर की सत्ता में हो विश्वास तेरा
सब कुछ है उसका न तेरा न मेरा
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ईश्वर को भूला जो, वो मानुष नहीं है , ये मानव
जन्दगी है |
कर्मों का फल मिलेगा बात ये सही है ,ये
मानव जिन्दगी है ||
अनन्तराम मिश्र

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