कृष्ण को बुलावा

                         द्रोपदी की पुकार

तर्ज  > प्यार झूठा सही दुनिया को ...................
आज विपदा पड़ी मुझपे तू मिटाने आजा ,ऐ मेरे श्याम मेरी लाज बचाने आजा |
आजा आजा आजा आजा ......................
पती पाँचों हैं मेरे बैठे मुझे हारे हुए ,सभा के बीच में सर अपना नीचे डारे हुए ,
इनमें इतनी नहीं हिम्मत ये बचा ले मुझको ,होके मजबूर तेरी बहना पुकारे तुझको |
तू है असहायों का ये सबको दिखाने आजा ,ऐ मेरे श्याम मेरी लाज बचाने आजा || १||

खलों के बीच अकेली मै फंसी हूँ मोहन , कर रहा लाज से खिलबाड आज दुर्योधन ,
कहीं ऐसा ना हो कि मेरी लाज लुट जाए ,तेरी बहना का शर्म से ही सर न झुक जाए |
सभा में जा रही इज्जत को बचाने आजा , ऐ मेरे श्याम मेरी लाज बचाने आजा  ||२||

पुकार इस तरह जैसे ही सुनी द्रोपदि की , दौड़कर आये नहीं देर जरा सी भी की |
बढाया चीर है द्रोपदि का आज मोहन ने ,बचाई लाज एक अबला की मनमोहन ने |
पुकारे भक्त सभी दर्श दिखाने आजा , ऐ मेरे श्याम मेरी लाज बचाने आजा  ||
आज विपदा पड़ी ............
         

                               रचनाकार > अनन्तराम मिश्र

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