याद आनी हैँ

 
मैं तो याद आऊंगा तुम भुला न पाओगी ,
प्यार भरे गीतों को जब भी गुंनगुनाओगी ।
कम्पित अधर नयनों में प्रेम की निशानी है ,
जितना भूलना चाहोगी याद उतनी आनी है।
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हम जुदा हुए जब से जग ये सूना सूना है ,
तेरे लिए इस दिल में प्यार बढ़ा दूना है,
साथ में जो गुजरे वो लम्हें याद आते हैं ,
क्या बताऊँ मुझको ये किस तरह सताते हैं ,
लव पे तो खामोशी है और नयन में पानी है ।
जितना भूलना चाहोगी....
                           2
ना ही बेवफा हम हैं ना खता तुम्हारी है ,
हम अलग हुए इसमें किस्मतें हमारी हैं ।
जिंदगी ने अपने संग खेल ऐसा खेला है 
भीड़ में हैं लाखों की फिर भी मन अकेला है ,
प्यार मिलता किस्मत से बात ये पुरानी है ।।
 जितना भूलना चाहोगी याद...
                        3
खुश सदा रहो हमदम ये दुआ हमारी है,
तुम मिलो या ठुकराओ अब रजा तुम्हारी है ,
आप तो वही करना आपको जो भाता है ,
रुसवा किसी को करना मुझको भी न आता है ,
हँसते गाते जो गुजरे वो ही जिंदगानी है 
  
जितना भूलना चाहोगी याद उतनी आनी है ।।
         
                                 अनंतराम मिश्र 

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