नेता और वॊटर
नेता - ना माँगे सोना चाँदी ना माँगे हीरे मोती
ये मेरे किस काम के ।
वोट की चाहत दर तेरे लायी ,दे दे दे दे दे
दे मेरे भाई वोट तू अपना मुझे ॥
वॊटर - इतने दिनों के बाद हो आये वोट माँगने दर पर तुम , इतने दिन तुम कहाँ रहे 2 ॥
नेता -पूछो ना कैसे मैंने दिन ये बिताये 2
जनता को ठेंगे पर रक्खा
माल पुआ जी भरकर खाये , पूछो ना कैसे मैंने दिन ये बिताये ॥2॥
वॊटर - वोट माँगने फिर आये हो शर्म तुम्हें है जरा नहीं
पाँच साल तक इतना खाया पेट क्या फिर भी
भरा नहीं ॥2॥
नेता - मेरे पेट मे क्या भरा है तू कहे तो मै बता दूँ
विश्वास कर ले मेरा धोखा कभी भी ना दूँ ,
मेरे पेट मे........
नाली की ईंटें खाई सड़कों की बजरी खाई
सोलर की लाल टेने रिश्तेदारों को जलवाई
मेर बस अगर चले तो मै देश बेच खा लूँ
मेरे पेट मे क्या..............॥
वॊटर -मैंने जिसको वोट दिया था, वोट दिया था 2
मैंने जिसे सपोट॔ किया था वो थे तुम वो थे तुम वो थे तुम वो थे तुम ॥
नेता - अहसान तेरा होगा मुझपर, तुम वोट अगर मुझको दे दो मै फिर से विधायक बन जाऊँ ,
मुझे सदा विधायक रहने दो । अहसान तेरा.....
वॊटर -बड़े नाट्की हैं ये टोपी वाले ,
इनके दिल में छुपा चोर है
जाने कितने किये हैं घोटाले
बेईमानी में ये जोर हैं ,
बड़े नाटकी हैं ये.......
नेता -तेरे दर पर आया हूँ कुछ करके जाऊँगा
वोट लेकर जाऊँगा नोट देकर जाऊँगा
मै तेरे दर पर आया हूँ......
वॊटर - इससे पहले तू वोट ले पाये ,
मुझको नोटो का बैग दे पाये
असलियत सबको मैं बता दूँगा
मैं तेरा भेद खोल डालूंगा ॥
नेता -मत हो तू खफा भूल जा तू हुआ सो हुआ
ऐसा पहले भी हुआ है नया मैंने क्या किया है
मेरी मक्कारियों को भूल जा , मत हो तू...
वॊटर - नेता रे तू है बुरा तू है बुरा तुझसे बुरा ना कोय
जनता को तू धता बताये वोट की खतिर रोये
नेता रे...........
झूठे ख्वाब दिखा के लालच दिलाके लोगों को तू
बहकाये जनता को तू धता बताये वोट की खातिर रोये नेता रे...........
अनन्त राम मिश्र
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