बेरुखी
1 मेरी आँखे तेरे दीदार को बेताब रहती हैं, डूबकर यादों के दरिया में ये दिन रात बहती हैं । तुम्हारी और हमारी अब तो हैं राहें जुदा हमदम, तेरी नजरें न अब...
ये ब्लाग मैंने अपनी स्वरचित रचनाओं के लिए लिखना शुरू किया है इस ब्लाग पर मेरी स्वरचित रचनायें हैं, तथा हिंदी साहित्य , एवं व्याकरण से संबंधित विविध विषयों पर मैंने सरलता से हिंदी विषय के छात्र/छात्राओं के लिए काव्यमय ट्रिक से विषय को तैयार किया है, स्वरचित सामग्री के अतिरिक्त यहां पर आपको संस्कृत विषय गत सामग्री भी प्राप्त होगी , "अनंत संसार" पर आपका स्वागत है 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 अनंतराम मिश्र मो.न.07897195067, 07007036119