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बेरुखी

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                           1   मेरी आँखे तेरे दीदार को बेताब रहती हैं, डूबकर यादों के दरिया में ये दिन रात बहती हैं । तुम्हारी और हमारी अब तो हैं राहें जुदा हमदम, तेरी नजरें न अब...

चुनाव चिन्ह

दिल में है  किसके क्या ये कोई कह ना पाता है, होता है जब प्रभात "कमल "खिल ही जाता है, " हाथी "पड़ा बीमार ना उसकी कोई दवा , "पंजा "तो "साइकिल" में ब्रेक  ही लगाता है ,,!!             चुनाव के बा...