बेरुखी
1
मेरी आँखे तेरे दीदार को बेताब रहती हैं,
डूबकर यादों के दरिया में ये दिन रात बहती हैं ।
तुम्हारी और हमारी अब तो हैं राहें जुदा हमदम,
तेरी नजरें न अब मुझसे कभी कोई बात कहती हैं।।
2
हुए जब से खफा तुम,
दिल मेरा बेचैन रहता है ।
तुम्हारी बेरुखी ये तो सनम,
दिन रैन सहता है।
खता इतनी सी बस मेरी थी ,
तुमको दिल से चाहा था।
यूँ चाहत को न ठुकराओ ,
दिवाना तुमसे कहता है ।।
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