बड़े का दर्द
" किसी के हिस्से में मकाँ आया ,
किसी के हिस्से में दुकाँ आयी ,
मैं घर में सबसे छोटा था , मेरे हिस्से में माँ आयी,
किसी के हिस्से में दुकाँ आयी ,
मैं घर में सबसे छोटा था , मेरे हिस्से में माँ आयी,
एक मशहूर शायर की इन पंक्तियों ने ,
कविता प्रेमियों की बहुत वाह वाही पायी,
पर मुझ नाचीज को ,एक बात समझ में नही आयी ,
अपनी अपनी तारीफ करना बात,
सदियों पुरानी है ,
मगर घर में छोटा होना ही क्या श्रवण कुमार की निशानी है,
कविता प्रेमियों की बहुत वाह वाही पायी,
पर मुझ नाचीज को ,एक बात समझ में नही आयी ,
अपनी अपनी तारीफ करना बात,
सदियों पुरानी है ,
मगर घर में छोटा होना ही क्या श्रवण कुमार की निशानी है,
बड़े को लोभी ,लालची आपने ठहराया है,
पर बड़े के बड़प्पन को कौन समझ पाया है ,
पहले छोटों को खिलाकर तब स्वयम खाता है,
छोटों के नाज नखरे बड़ा ही उठाता है,
हमें तो कभी -कभी दूर से ही दुत्कार दिया जाता था,
सारा प्यार तो छोटे पर ही निसार किया जाता था ,
बड़ा जिम्मेदारियों का पहाड़ उठाता है ,
ऐसे में छोटा सिर्फ मौज मस्ती मनाता है ,
आप रहे माँ के प्यारे माँ के दुलारे ,चुप चुप
माँ ने आपको मलाई भी तो खिलाई है ,
अब क्यों परेशान हो रहे हो जब तुम्हारे हिस्से में माँ आई है ।।
सारी दुनिया सच जानती है,फिर भी क्यों बहकाते हो ,
जायदाद में पूरा हिस्सा लेकर माँ के ही हिस्से में आने की बात सुनाते हो,
ऐसी झूठी गप्पें मेरे भाई मत मारा करो ,
कानून सभी जानते हैं कुछ तो मन में विचारा करो,
ऐसी बातें करने से आपकी कलई खुल जाएगी
श्रवण कुमार बनकर मिलने बाली इज्जत धूल में मिल जाएगी ,
आपके शब्दों ने बड़ों को लोगों की नजरों में गिराया है,
पर दूसरों को नीचा दिखाने वाला कब ऊंचा उठ पाया है,
छोटा होने से ही कोई श्रवण कुमार नहीं बन जाता है,
ना बड़ा होने से कोई बेईमान कहलाता है ,
माँ का स्थान दुनिया मे सबने सर्वोपरि माना है,
माँ के पास ममता का अनमोल खजाना है,
लेकिन जिस पिता ने पढ़ा लिखाकर समाज में रहने योग्य बनाया है,
हमारी माँगो की पूर्ति करने में अपनी सारी जिंदगी को खपाया है,
उस पिता को भला क्यों भूल जाते हैं ,
जिसके नाम से ही हम समाज में पहचाने जाते हैं ,
बड़ों पर आपने जो तोहमत लगाई ,बड़ों की आपने जग में की रुसबाई है
बाप को भी किसी के हिस्से में आना था,,इसीलिये माँ आपके हिस्से में आई है।।,
Anantram Mishra
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