जबाब दो

पिछले दिनों के घटनाक्रम पर प्रस्तुत है मेरी कुछ नवीन पंक्तियां:-
1- सेना पर पत्थर चलें आंख किए क्यों बंद ,
छप्पन इंची वक्ष की गति क्यों पड़ गई मंद ।।

मोदी जी कुछ तो बताओ ना ऐसे आंख छुपाओ

2- देश के रक्षक की व्यथा कोई समझ न पाए ,
                      हाथों में स्टेनगन फिर भी हैं असहाय ।

लात और घूँसे खाते ,सहन क्यों सब कर जाते

3- क्यों इतने मजबूर हो , क्यों इतने लाचार,
                 सेना पत्थर खा रही काहे की सरकार ।  

जनता विश्वास जताए ,खरे क्यों उतर न पाए

4- कैसे क्षत्रिय पुत्र हैं, गृहमंत्री जी आप,

            सुकमा में सैनिक मरें आप करें आलाप,

सैनिकों के शव जलते ,आप बस निंदा करते , 

5- नक्सलियों को दीजिये , अब मुँहतोड़ जबाव,
                    वरना डीगें मारना , कर दो बन्द जनाब ।

नाप सीने का घटाओ नहीं तो कुछ करके दिखाओ

                                         अनंतराम मिश्र

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