याद तक आई नहीं
प्यार में एक लम्हा भी होती तन्हाई नहीं,
दिल में जो बसते हैं ,उनकी होती रुसबाई नहीं।
लाख तुम बातें करो,भूली नहीं तुमको सनम,
पर तुम्हें एक पल भी मेरी याद तक आई नहीं।
दिल में जो बसते हैं ,उनकी होती रुसबाई नहीं।
लाख तुम बातें करो,भूली नहीं तुमको सनम,
पर तुम्हें एक पल भी मेरी याद तक आई नहीं।
2
तुम्हारे हुश्न पर जाने हुआ
क्यों दिल दिवाना था,
मेरे दिल का मधुर संगीत
तुमको सुनके जाना था,
तेरी मुस्कान पर हम बेवजह
कुर्बान हो बैठे,
तेरे नाजुक से होठों पर
तो औरों का तराना था ।।
तुम्हारे हुश्न पर जाने हुआ
क्यों दिल दिवाना था,
मेरे दिल का मधुर संगीत
तुमको सुनके जाना था,
तेरी मुस्कान पर हम बेवजह
कुर्बान हो बैठे,
तेरे नाजुक से होठों पर
तो औरों का तराना था ।।
3
तुझे समझा था मैंने क्या
न जाने क्या तु निकली है,
मेरे अरमानों के आकाश पर
तो छायी बदली है,
गिला तुमसे नहीं कोई
न किस्मत को ही कोसूंगा,
तुझे तेरा मिले वो प्यार में
तू जिसके पगली है ।।
तुझे समझा था मैंने क्या
न जाने क्या तु निकली है,
मेरे अरमानों के आकाश पर
तो छायी बदली है,
गिला तुमसे नहीं कोई
न किस्मत को ही कोसूंगा,
तुझे तेरा मिले वो प्यार में
तू जिसके पगली है ।।
4
तेरी प्यारी सी सूरत को
मैं इस दिल में बसा लूँगा
तेरी यादों में जब धड़केगा दिल
उसको दबा दूंगा
तेरे दीदार को मेरे नयन
जिस वक्त तरसेंगे
मैं उस क्षण अपने
मन मंदिर में प्रिय तुझको निहारूँगा ,
अनन्तराम मिश्र
तेरी प्यारी सी सूरत को
मैं इस दिल में बसा लूँगा
तेरी यादों में जब धड़केगा दिल
उसको दबा दूंगा
तेरे दीदार को मेरे नयन
जिस वक्त तरसेंगे
मैं उस क्षण अपने
मन मंदिर में प्रिय तुझको निहारूँगा ,
अनन्तराम मिश्र
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