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तेरा क्या कहना

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चाँदनी सा वदन , चेहरा है चन्द्रमा लट हैं सावन के मेघों की परछाइयाँ । होंठ हैं या गुलाबों की दो पंखुड़ी , जब जुदा हों तो बजती हैं शहनाइयाँ ।। चाँदनी सा......... काम के धनु की कमनीयता को ल...