तेरा क्या कहना
चाँदनी सा वदन , चेहरा है चन्द्रमा लट हैं सावन के मेघों की परछाइयाँ । होंठ हैं या गुलाबों की दो पंखुड़ी , जब जुदा हों तो बजती हैं शहनाइयाँ ।। चाँदनी सा......... काम के धनु की कमनीयता को ल...
ये ब्लाग मैंने अपनी स्वरचित रचनाओं के लिए लिखना शुरू किया है इस ब्लाग पर मेरी स्वरचित रचनायें हैं, तथा हिंदी साहित्य , एवं व्याकरण से संबंधित विविध विषयों पर मैंने सरलता से हिंदी विषय के छात्र/छात्राओं के लिए काव्यमय ट्रिक से विषय को तैयार किया है, स्वरचित सामग्री के अतिरिक्त यहां पर आपको संस्कृत विषय गत सामग्री भी प्राप्त होगी , "अनंत संसार" पर आपका स्वागत है 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 अनंतराम मिश्र मो.न.07897195067, 07007036119