तेरा क्या कहना
चाँदनी सा वदन , चेहरा है चन्द्रमा
लट हैं सावन के मेघों की परछाइयाँ ।
होंठ हैं या गुलाबों की दो पंखुड़ी ,
जब जुदा हों तो बजती हैं शहनाइयाँ ।।
चाँदनी सा.........
काम के धनु की कमनीयता को लिए
ये भवें आपकी जिनपे छाया किये 2
हैं कमल दल से सुंदर नयन दो बड़े,
जिनमें मृगनेत्र जैसी हैं चतुराइयाँ ।
चाँदनी सा...........
सुर्ख गालों पे लाली हया की लिए
मुस्कुराती हो तो बिजलियाँ गिर पड़ें
रजत की कांति भी धुँधलकी सी लगे
जब चमकती तेरी दन्त की पंक्तियाँ
चाँदनी सा वदन.........
साँचे में है ढला तेरा सारा वदन ,
और तन से भी सुंदर है ये तेरा मन,
जिसको मिल जाएगी तू उसे यूँ लगे
पतझडों बाद फूली हों अमराइयाँ ।।
चाँदनी सा वदन चेहरा है चंद्रमा ,
लट हैं सावन के मेघों की परछाइयाँ ।।
अनन्तराम मिश्र
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