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बुढ़ापे का विवाह

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         जब वर्ष पचास के हुइय गयनु ,            तब हमरेउ देखनौया आये मुलु बहुतन का लौटार दिहिन जब नीक आदमी नहीं पाए ।          आखिर का एक दुबे पण्डित           उई आई अड़ंगा डार दिहिन। हमरी शादी बरजोरी से, वोइ जल्दी ठीक कराइ दिहिन।         हमरे नजदीक आइ करिके ,          तब दुबे कही सुनु लेउ भैया । रुपया नौ सौ लड़की वाले , मागति हईं तुम दै देऊ भैया।           हम कही दुबे तुम जाऊ घरै ,           हम ब्याहु अइस करिवा नाहीं। मरि चाहे जाइ कुँवारे ही, पई कौड़ी एक देवो नाहीँ।          फिर लगे कहन पण्डित,          हमका लागति हइ तुम सठियाई गए । दरवाजे पर आवा वियाहु,...