टाइम पास (हास्य रचना)

एक दिन मेरा मित्र मुझसे ये कहने लगा,
        हो गई समस्या एक उसे सुलझाइए ,

किस्मत फूटी मेरी प्रेमिका है रूठी मेरी,
       उसको मनाने का उपाय बतलाइये,

मैंने पूछा श्रीमान कैसे हुआ व्यवधान,
पहले पूरी घटना तो मुझको बताइये ,

पहले रोग जान जाऊँ नुस्खा तभी बताऊँ,
फिर जाके उस नुस्खे को आजमाइये ।।1।

                     2
मित्र बोला कुछ न खास,
                गया था मैं उसके पास,
बोला उससे तुम मेरे जीवन की आस हो,

आता हूं तुम्हारे पास टाइम हो जाता पास,
जानेमन तुम मेरी अच्छी टाइमपास हो,

रूठ के वो चली गई किस्मत छली गई,
मेरी  जिंदगी में मानो आया बनवास हो,

आया मित्र तेरे द्वार कर दे मेरा उद्धार
तुम ही तो मित्र मेरे अंतिम मेरी आस हो।2

                       3

मैंने कहा मेरे यार करते हो यदि प्यार ,
बात करने का भी सलीका सीख आइये,

हिय जो अभिन्न करे मन को प्रसन्न करे,
बैसी प्रिय बात प्रियतम को सुनाइये,

बोलो तुम यही यार चाहे कहो बार बार,
पर बात कहने का ढंग आना चाहिए ,

बड़ी सीधी साधी यार गीत की हैं पंक्ति चार
वही  गीत जाके  उसके पास गुनगुनाइए ।।

       गीत है -
तेरे पास आके मेरा वक्त गुजर जाता है,
दो घड़ी के लिए गम जाने किधर जाता है,
तेरे पास आके मेरा........

                    4
मेरी बात मानी यार मिला उसे उसका प्यार
आप भी ये बात गाँठ बांधकर जाइये ,

प्रेमयुक्त बात करो किसी से न घात करो,
सभी करें प्रेम ऐसा खुद को बनाइये ,

वाणी में शहद घोलो बोल तौलकर बोलो,
जैसी चाहे लोग उन्हें वैसी ही सुनाइये ,

फ्रेंडशिप ब्रेक करे हार्ट को जो क्रेक करे,
ऐसी बात कभी भी जुबान पर न लाइये ।।

             अनंतराम मिश्र

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