मत कर गुरूर
1
इतने खुदगर्ज तुम क्यों सनम हो गए
हमसे इतने गिरे क्या करम हो गए,
प्यार शिद्दत से तुमने भी मुझसे किया,
फिर अकेले ही क्यों दोषी हम हो गए । 1।
2
बदले बदले से तुम लग रहे हो सनम,
सच में बदले हो तुम या है मेरा भरम
एक पल दूर रहना गवारा न था
रूठ जाते थे जब दूर जाते थे हम,।।2।।
3
चन्द दिन का है यौवन ये ढल जाएगा,
वक्त जैसा भी हो वह बदल जाएगा ,
रूप धन बुद्धि पर दर्प करना नहीं,
एक दिन गात अपना भी जल जाएगा।।3।।
4
मत स्वयं पर करो आप इतना गुरुर
रूप यौवन का तुम पर चढ़ा है शुरूर
यह जवानी रहेगी जवानी नहीं,
उम्र का सूर्य एक दिन ढलेगा जरूर ।।4।।
अनंतराम मिश्र
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