खामोश इश्क

वो दिल की बात का,इजहार नहीं करती है,
प्यार करती है पर ऐतवार  नहीं करती है ,
उसकी आँखे वयाँ कर जाती हैं सबकुछ फिर भी ,
अपने होठों से वो इकरार नहीं करती है ।।

होठों पर इनकार भले हो,
           प्यार वो मुझसे करती है,
याद में मेरी जाग जाग कर,
                ठंडी आहें भरती है,
दिल में कितना प्यार है उसके,
             उसको शायद पता नहीं,
लब से कुछ बोले ना बोले
             आँखें बातें करती हैं।
होठों पे इनकार भले...…......

जब मिलती है राहों में,
          नजरों से कुछ कह जाती है,
मेरे होठों की बातें बस,
    बस होठों पर रह जाती हैं,
कैसे कह दूँ तुझमें मुझको ,
                मेरा खुदा नजर आता,
दिल में लाखों बातें हैं,
              ना एक लफ्ज भी कह पाता,
आँखों के प्रश्नों के उत्तर
              हल नजरों से करती है,
होठों पर इनकार भले हो
             प्यार वो मुझसे करती है ।।

          "अनंतराम मिश्र"

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