पास आ भी जाओ सनम
जब से दिल उनसे हम लगा बैठे,
सुकूंन अपना सब लुटा बैठे ।
हर घडी बस खयाल है उसका,
ऐसे दिल जां में वो समा बैठे ।।
2
हमेशा बेकरार रहता है ,
ये जुदाई की तड़प सहता है ।
मेरा दिल अब नहीं रहा मेरा ,
ये तेरे आस-पास रहता है ।।
3
ये तमन्ना है अब मेरी हमदम,
तू रहे आस-पास ही हरदम।
अब तो काटे नहीं कटते ये जुदाई के पल,
तुम मेरे पास आ भी जाओ सनम ।।
4
हर घड़ी इंतजार है तेरा,
तेरी यादों का दिल पे है पहरा ।
शोखियां तेरी याद जब आयें ,
दिल न रहता है पास फिर मेरा ।।
5
तेरी यादों में जब मैं खो जाऊं ,
भरी महफ़िल में तन्हा हो जाऊं।
वो किसी और की अमानत है ,
कैसे नादान दिल को समझाऊं ।।
6
दूर रहना भी कम सजा है क्या,
इसमें रब की कोई रजा है क्या।
प्यार में दूरियां जरुरी हैं,
वरना मिलने का फिर मजा है क्या।।
7
तुझमें रब मुझको नजर आता है,
अपना आपस में पाक नाता है,
होंगे लाखों हसीं जमाने में ,
मुझको बस एक तू ही भाता है ।।
अनंतराम मिश्र
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