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कुछ तो शर्म करो

देश जलाने वालों कुछ तो शर्म करो , भय फैलाने वालों कुछ तो शर्म करो । आग लगाने वालों कुछ तो शर्म करो ,  बैर बढ़ाने वालों कुछ तो शर्म करो।। इन नेताओं की साजिश में आकर                                तुम फंस जाते , थोड़े लालच की खातिर,                 अपनों का लहू बहाते,  निज देश का मान घटे ,                      ना ऐसा कर्म करो ।। देश जलाने वालों कुछ तो शर्म करो,  भय फैलाने वालों कुछ तो शर्म करो, आपस में बैर बढ़ाकर कुछ,                    ना हासिल होना है , तुम समझ न पाते कुछ भी ,                   इस बात का ही रोना है,  गंगा जमुनी तहजीब का यूं ना दमन करो      देश जलाने वालों कुछ तो शर्म करो   बैर बढ़ाने वालों कुछ तो शर्म करो , कुछ ठोस हुए जो निर्णय          ...