कुछ तो शर्म करो

देश जलाने वालों कुछ तो शर्म करो ,
भय फैलाने वालों कुछ तो शर्म करो ।
आग लगाने वालों कुछ तो शर्म करो ,
 बैर बढ़ाने वालों कुछ तो शर्म करो।।
इन नेताओं की साजिश में आकर
                               तुम फंस जाते ,
थोड़े लालच की खातिर,
                अपनों का लहू बहाते,
 निज देश का मान घटे ,
                     ना ऐसा कर्म करो ।।
देश जलाने वालों कुछ तो शर्म करो, 
भय फैलाने वालों कुछ तो शर्म करो,
आपस में बैर बढ़ाकर कुछ,
                   ना हासिल होना है ,
तुम समझ न पाते कुछ भी ,
                  इस बात का ही रोना है,
 गंगा जमुनी तहजीब का यूं ना दमन करो      देश जलाने वालों कुछ तो शर्म करो
  बैर बढ़ाने वालों कुछ तो शर्म करो ,
कुछ ठोस हुए जो निर्णय 
                  दोगले पचा ना पाए ,
खिसकी जमीन जब इनकी ,
                  खुद को ही बचा न पाए ,
सोचा अब इनमें तुष्टिकरण का भरम भरो ।।देश जलाने वालों कुछ तो शर्म करो ,
भय फैलाने वालों कुछ तो शर्म करो 
आग लगाने वालों कुछ तो शर्म करो,
बैर बढ़ाने वालों कुछ तो शर्म करो । ।
                  अनंतराम मिश्र 
                   7897195067

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