वित्तविहीन शिक्षकों की व्यथा
1
इस कोरोना काल में निर्धन वित्तविहीन सरकारें सुनती नहीं कार्य करेंगे नवीन ।। 2
लगी प्रतिष्ठा दांव पर ,कुछ भी नहीं सुहाय शिक्षक यदि भूखा मरा लगेगी तुमको हाय।।
रे योगी लगेगी तुमको हाय
3
नया काम ना हो सके कुछ तो समझो पीर , शिक्षक हूं सम्मान की , पैर पड़ी जंजीर ।।
4
कानों में सरकार ने तेल लिया है डाल ,
वित्तविहीनों का उसे नहीं पता है हाल ।।
हो योगी नहीं पता है हाल
5
ठेका बाजारें खुलीं ,खुले नहीं स्कूल ,
बच्चों ने जो कुछ पढ़ा ,
अब तक सब गएभूल । ।
रे भैया अब तक सब गए भूल
अनन्तराम मिश्र
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