सरस्वती वंदना तर्ज़-आज कल याद कुछ और रहता नहीं
ओ मेरी शारदे तेरा सुमिरन करूँ
सत्य पथ पर रहूं माँ मुझे ज्ञान दे।
भक्ति में लीन तेरी मेरा मन रहे,
मातु मुझको अटल ऐसा वरदान दे।।
ओ मेरी..............
ज्ञान की तू है देवी जगत जानता,
जग से तू दूर कर दे माँ अज्ञानता ।
सब चलें अपने कर्त्तव्य के मार्ग पर ,
पथ से विचलित ना हों माँ तू ही ध्यान दे ।
ओ मेरी शारदे...............
जो भी करते हैं साहित्य की साधना,
गीतों में छन्दों में तेरी आराधना ।
पूर्ण हो उनकी मनवांछित कल्पना
वाणी पुत्रों को अपने तू वरदान दे ।।
ओ मेरी शारदे तेरा सुमिरन करूँ,
सत्य पथ पर रहूं माँ यही ज्ञान दे।
भक्ति में लीन तेरी मेरा मन रहे
मातु मुझको अटल ऐसा वरदान दे ।।
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