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क्यों नाम लिख लिया

पहले गिरा के बिजलियाँ दीवाना कर दिया , खुद बन गईं शमा मुझे परवाना कर दिया | आँखों में तेरी प्यार है ,इनकार लवों पर , तेरी इस अदा ने मुझको तो अन्जाना कर दिया || दिल की दीवारों पर तुम्हारा नाम लिख लिया , तुमको लिखा रति खुद को मैनें काम लिख लिया | इनकार मेरे प्यार से करती हो तुम मगर , अपनी हथेली पर क्यों मेरा नाम लिख लिया || मंजिल न थी रस्ता न था फिर भी थे चल दिए , राहों तेरे प्यार के लाखों जले दिए | आया जो एक तूफ़ान सारे दीप बुझ गए , वादे तो सारी उम्र साथ चलने के किये ||

पैरोडी रचना तर्ज < तू मेरी जिन्दगी है

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ये मानव जिन्दगी है 2 कर्मों का फल मिलेगा बात ये सही है | ये मानव जिन्दगी है ...................... बड़े भाग्य से तूने नर तन है पाया 2, पड़कर प्रपंचों में समय को गँवाया | ईश्वर को भूला प्यारे लावधुन लगी है ,ये मानव जिन्दगी है |कर्मों .................... समझा तू जिसको अपना वो सब है पराया साथ में न जा पायेगी तेरी भी काया | जानकार भी मन में धन की तृष्णा जगी है , ये मानव जिन्दगी है .................. ईश्वर की सत्ता में हो विश्वास तेरा                   सब कुछ है उसका न तेरा न मेरा | ईश्वर को  भूला जो, वो मानुष  नहीं है , ये मानव जन्दगी है | कर्मों का फल मिलेगा बात ये सही है ,ये मानव जिन्दगी है ||                                      अनन्तराम मिश्र 

"शाम ढले'"

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शाम ढले जब याद में तेरी, गुजरा जमाना तड़पाये  तुमसे करना प्यार की बातें , हर लम्हा मुझे याद आयें || शाम ढले ................................. पास मेरे जब तुम होते थे कितना अच्छा लगता था , तू है  बस मेरा ही हमदम इतना सच्चा लगता था | लेकिन अब है लम्बी जुदाई कौन खबर उसकी लाये || शाम ढले जब ................................................ भूल ना पाऊँ तुझको तेरी याद सताती रहती है , याद तेरी वो प्यारी बातें हरपल आती रहती हैं | नामुमकिन हैं अब तो मिलना, बस ख्वावों में तू आये || शाम ढले जब ........................................ ना तुम ना हम हुए बेवफा ,किस्मत अपनी खफा हुई , जीवन में लिक्खी थी जुदाई ,तभी तो ऐसी खता हुई | तू तो याद रहेगा मुझको , भूल भले ही तू जाये || शाम ढले जब याद में ....................................... भुला दिया जब तुमने सारी कसमों सारे वादों को , चाहा लाख मिटा दूं अपने दिल से तेरी यादों को | पर तेरी यादें हैं सब कुछ ,कैसे इन्हें भुला पायें || शाम ढले जब याद में तेरी ,गुजरा जमाना तड़पाए | तुमसे करना प्यार की बातें हर लम्हा ...