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प्यारे दिन 28/02/2025

रोज ही आप हम यूँ ही मिलते रहें , प्यार का सिलसिला यूँ ही चलता रहे। आपका हँसता चेहरा रहे सामने , आपको देख दिल मेरा खिलता रहे ।। रोज ही आप ..….. आप तो जानते हो मेरे दिल का हाल, इसलिए रखते हो मेरा इतना खयाल । अपने रब से करूँ बस दुआ ये सनम, प्यार तेरा यूँ ही मुझको मिलता रहे ।। रोज ही आप यूँ ............ तेरी जुल्फों में सो जाऊं जी चाहता , तेरी आँखों में खो जाऊं जी चाहता । मेरे आगोश में बस रहो हमनशीं , सिलसिला ये हमेशा ही चलता रहे ।। रोज ही आप यूँ .................. तुम सनम हो मेरी एक हसीं जुस्तजू ,   तू बसी नयनों में मेरे ख्वाबों में तू । तेरे मुस्कान पर लुट गया जानेमन,        तेरे ही प्यार में दिल धड़कता रहे ।। रोज ही आप यूं हमसे मिलते रहें   प्यार का सिलसिला यूं ही चलता रहे ।। ✍️✍️ अनंतराम मिश्र ✍️ ✍️    

❤️💔 तू प्यार है मेरा💔❤️

   तेरी बेरुखी  को भी अब हम सहेंगे ,                      तुम्हें प्यार करते हैं करते रहेंगे , तुम्हें अपना दिल अपनी जां मानते हैं,              है प्यार कितना ना हम जानते हैं । तुम्हारी ही सूरत है आंखो में रहती,        तू ख्वाबों में आकर यही मुझसे कहती। बहुत चाहती मैं तुझे मेरी जाना,        जुदा तुझसे होकर  ना हम रह सकेंगे।। तेरी बेरुखी............. वो लम्हें वो दिन कैसे भुला पाएंगे हम,               बहुत ही तुम्हें याद अब आयेंगे हम। तेरी याद एक पल भी दिल से न जाती,             भला किसलिए इस तरह तू सताती, मिलें सारी दुनियां की खुशियां तुझे अब,                   अपने खुदा से दुआ हम करेंगे ।। तेरी बेरुखी को भी अब हम सहेंगे,              तुझे प्यार करते ...

भूल जाऊँगा तुझे

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सरस्वती वंदना तर्ज़-आज कल याद कुछ और रहता नहीं

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ओ मेरी शारदे तेरा सुमिरन करूँ      सत्य पथ पर रहूं माँ मुझे ज्ञान दे। भक्ति में लीन तेरी मेरा मन रहे,      मातु मुझको अटल ऐसा वरदान दे।। ओ मेरी.............. ज्ञान की तू है देवी  जगत जानता,   जग से तू दूर कर दे माँ  अज्ञानता । सब चलें अपने कर्त्तव्य के मार्ग पर ,   पथ से  विचलित ना हों माँ तू ही ध्यान दे । ओ मेरी शारदे............... जो भी करते हैं साहित्य की साधना,          गीतों में छन्दों में तेरी आराधना ।   पूर्ण हो उनकी मनवांछित कल्पना         वाणी पुत्रों को अपने  तू वरदान  दे ।। ओ मेरी शारदे तेरा सुमिरन करूँ,      सत्य पथ पर रहूं माँ यही ज्ञान दे। भक्ति में लीन तेरी मेरा मन रहे       मातु मुझको अटल ऐसा  वरदान दे ।।            ✍️✍️Anantram Mishra 

आहिस्ता आहिस्ता

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एक छोटी सी रचना- वो आँखों के रस्ते थे जब दिल मे उतरे ,           जुड़ा उनसे कैसा ये बेनाम रिश्ता । किसी के लिए वो तो एक शख्स होगा ,      मगर मुझको लगता था जैसे फरिश्ता। भुला बैठता था मैं ग़म सारे अपने,   वो नूरानी चेहरा था, जब जब भी हँसता। ज़माने की बंदिश से मजबूर होकर,          हुए दूर  थे हम  आहिस्ता आहिस्ता।।                  ✍️Anantram Mishra